तलाक की खबरों पर अंकिता का करारा जवाब: \’सब बकवास है\’
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Karan Patel Divorce Rumors ने पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर काफी हलचल मचा रखी थी, लेकिन अब इन खबरों पर विराम लग गया है। \’ये है मोहब्बतें\’ फेम एक्टर करण पटेल की पत्नी और एक्ट्रेस अंकिता भार्गव ने इन अफवाहों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके और करण के बीच सब कुछ ठीक है और अलगाव की बातें केवल कोरी कल्पना हैं।

ट्रोलिंग से निपटना अब बन गई है आदत Karan Patel Divorce Rumors को लेकर हो रही ट्रोलिंग पर अंकिता ने बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि समय के साथ उन्होंने इन नेगेटिव बातों से \’स्विच ऑफ\’ होना सीख लिया है। अंकिता के अनुसार, शुरुआत में ये बातें परेशान करती थीं, लेकिन अब वे जानती हैं कि सोशल मीडिया पर चल रही हर खबर सच नहीं होती। उन्होंने ट्रोलर्स को नजरअंदाज करना ही सबसे बेहतर विकल्प माना है।

शादीशुदा जिंदगी और आपसी तालमेल Karan Patel Divorce Rumors के बीच अंकिता ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने साझा किया कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते अक्सर ऐसी अफवाहें उड़ती रहती हैं, लेकिन उनके बीच का भरोसा और प्यार इन सबसे कहीं ऊपर है। करण और अंकिता की जोड़ी को टीवी इंडस्ट्री की सबसे मजबूत जोड़ियों में गिना जाता है, और अंकिता के इस बयान ने उनके फैंस को बड़ी राहत दी है।

फेक न्यूज के खिलाफ खड़ी हुईं अंकिता Karan Patel Divorce Rumors पर चुप्पी तोड़ते हुए अंकिता ने यह भी संदेश दिया कि बिना सच्चाई जाने किसी की पर्सनल लाइफ पर टिप्पणी करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी निजी दुनिया में बहुत खुश हैं और ऐसी अफवाहों का उनकी खुशियों पर कोई असर नहीं पड़ता। फिलहाल, करण और अंकिता अपनी बेटी मेहर के साथ अपनी लाइफ एन्जॉय कर रहे हैं और इन फेक न्यूज को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।

बॉक्स ऑफिस पर \’धुरंधर\’ धमाका: रणवीर ने रचा इतिहास
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Dhurandhar 2 Box Office Collection ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते में भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। रणवीर सिंह स्टारर इस स्पाई ड्रामा ने न केवल भारत में बल्कि नार्थ अमेरिका के बाजारों में भी टॉप 10 फिल्मों की सूची में जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया है।

तीसरे हफ्ते में भी जारी है कमाई की सुनामी Dhurandhar 2 Box Office Collection की रफ्तार भले ही अब थोड़ी धीमी हुई हो, लेकिन इसके आंकड़े अब भी चौंकाने वाले हैं। फिल्म ने अपने 21वें दिन बुधवार को करीब 7.90 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन अब 1041.27 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो किसी भी भारतीय फिल्म के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

वर्ल्डवाइड कलेक्शन में मची भारी खलबली Dhurandhar 2 Box Office Collection की गूंज केवल देश तक ही सीमित नहीं है, विदेशों में भी फिल्म का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। ओवरसीज मार्केट से अब तक 404 करोड़ रुपये की कमाई हो चुकी है। अगर वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन की बात करें, तो यह फिल्म अब 1,641.21 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच गई है, जो इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।

दिग्गज सितारों की फौज और एक्शन का तड़का Dhurandhar 2 Box Office Collection को इस मुकाम तक पहुंचाने में फिल्म की स्टारकास्ट का बड़ा हाथ है। रणवीर सिंह के साथ आर. माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकारों ने फिल्म में जान फूंक दी है। लोकेश धर और ज्योति देशपांडे द्वारा निर्मित इस फिल्म को देखने के बाद संदीप रेड्डी वांगा जैसे निर्देशकों ने भी इसकी जमकर तारीफ की है, जिससे दर्शकों के बीच फिल्म का क्रेज और बढ़ गया है।

नारी शक्ति का उदय: लोकतंत्र में बराबरी का शंखनाद
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Women Reservation Bill Indian Democracy के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। दशकों के लंबे इंतजार के बाद, \’नारी शक्ति वंदन अधिनियम\’ अब हकीकत बनने की राह पर है। यह कानून न केवल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय राजनीति के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से बदल देगा।

आंकड़ों का आइना: क्यों जरूरी है यह बदलाव? Women Reservation Bill Indian Democracy के लिए इसलिए अनिवार्य है क्योंकि देश की लगभग 48.5% आबादी होने के बावजूद, संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 14% है। राज्यों की विधानसभाओं में तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां महिला विधायकों की संख्या केवल 10% के आसपास सिमटी हुई है। जब तक सदन में महिलाओं को पर्याप्त मौका नहीं मिलेगा, तब तक लोकतांत्रिक संतुलन अधूरा रहेगा।

तीन दशकों का संघर्ष और अब अंतिम पड़ाव Women Reservation Bill Indian Democracy की यात्रा 1996 में एचडी देवेगौड़ा सरकार के समय शुरू हुई थी। पिछले तीन दशकों में चार असफल प्रयासों के बाद, अब 16 से 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। पीएम मोदी ने भी अपील की है कि इस ऐतिहासिक बिल को बिना किसी विरोध के पास किया जाना चाहिए ताकि आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार मिल सके।

नीतियों में संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय Women Reservation Bill Indian Democracy के लागू होने से न केवल राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीतियों के निर्माण में भी महिलाओं के मुद्दों को प्रमुखता मिलेगी। जब सदन में अधिक महिलाएं होंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे विषयों पर अधिक सटीक और संवेदनशील चर्चा हो सकेगी। यह बदलाव भारत के लोकतंत्र को अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।

एक मां की मुस्कान और हजार माताओं का मातम

US Pilot Returns From Iran की खबर ने दुनिया भर में मानवता और युद्ध के दो अलग-अलग चेहरों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक अमेरिकी मां की प्रार्थना तब रंग लाई जब उनका बेटा, जो एक फाइटर पायलट था, सुरक्षित घर लौट आया। लेकिन इस खुशी के शोर में उन 1600 ईरानी माताओं की सिसकियां दब गई हैं, जिन्होंने इस भीषण बमबारी में अपने जिगर के टुकड़ों को हमेशा के लिए खो दिया।

युद्ध की विभीषिका और मासूमों की बलि US Pilot Returns From Iran के बीच ईरान से आ रहे आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। अमेरिकी-इजरायली हमलों में अब तक 3500 से अधिक ईरानी मारे जा चुके हैं, जिनमें 1600 से अधिक आम नागरिक और करीब 250 मासूम बच्चे शामिल हैं। तेहरान के पास मिनाब के एक स्कूल पर गिरी मिसाइल ने सौ से ज्यादा बच्चों की जिंदगी पलक झपकते ही खत्म कर दी, जिससे मानवता शर्मसार हुई है।

गांधीवादी दर्शन और हिंसा का दुष्चक्र सत्ताधीश भले ही युद्ध को जरूरी बताएं, लेकिन US Pilot Returns From Iran की घटना यह याद दिलाती है कि हिंसा हमेशा प्रतिहिंसा को जन्म देती है। महात्मा गांधी के अनुसार, हिंसा से प्राप्त कोई भी परिणाम स्थायी नहीं होता, बल्कि उसका बुरा असर पीढ़ियों तक बना रहता है। इस युद्ध से केवल हथियार बेचने वाली कंपनियों और अपनी कुर्सी बचाने वाले राजनेताओं को फायदा हो रहा है, जबकि आम इंसान केवल तबाही झेल रहा है।

शांति ही एकमात्र समाधान: भारत का रुख US Pilot Returns From Iran के बाद दुनिया को यह समझना होगा कि तबाही से उबरने में दशकों लग जाते हैं। यूक्रेन युद्ध का उदाहरण सबके सामने है, जहां बुनियादी ढांचे को सुधारने में अरबों डॉलर लगेंगे। भारत ने हमेशा पश्चिम एशिया और यूक्रेन में शांति की वकालत की है। क्योंकि शांति ही समृद्धि का द्वार खोलती है और युद्ध केवल विनाश की ओर ले जाता है। अब समय है कि दुनिया प्रतिशोध छोड़कर संवाद का रास्ता चुने।

दुनिया में नई दरार: ट्रंप की नीति से बिछड़े पुराने साथी

Trump Iran War Policy ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ऐसा भूकंप ला दिया है, जिसने अमेरिका के सबसे करीबी वैचारिक दोस्तों को भी उनसे दूर कर दिया है। व्हाइट हाउस वापसी के बाद डोनल्ड ट्रंप ने जिन दक्षिणपंथी ताकतों के साथ मिलकर नई वैश्विक धुरी बनाने का सपना देखा था, वही अब उनके सैन्य संघर्ष के फैसले के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं।

यूरोपीय दिग्गजों ने खींचे हाथ: मेलोनी और ले पेन का रुख Trump Iran War Policy को लेकर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और फ्रांस की कद्दावर नेता मरीन ले पेन ने कड़ा रुख अपनाया है। कभी ट्रंप की नीतियों के समर्थक रहे इन नेताओं ने अब उनकी युद्ध नीति को \’अस्थिर\’ बताते हुए उससे दूरी बना ली है। मेलोनी ने तो यहां तक कह दिया कि वह सिसिली हवाई अड्डे का उपयोग सैन्य अभियानों के लिए नहीं करने देंगी, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है।

नाटो सहयोगियों पर भड़के ट्रंप ईरान के खिलाफ शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष में उम्मीद के मुताबिक समर्थन न मिलने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की तीखी आलोचना की है। Trump Iran War Policy के कारण पैदा हुए इस तनाव ने एमएजीए (MAGA) समर्थकों और यूरोपीय राष्ट्रवादियों के बीच की एकजुटता को खत्म कर दिया है। जर्मनी की \’अल्टरनेटिव फार जर्मनी\’ पार्टी ने तो देश में मौजूद अमेरिकी हवाई अड्डों को खाली करने तक की मांग उठा दी है।

अकेले पड़ते ट्रंप और भविष्य की चुनौतियां हालांकि हंगरी के विक्टर ओर्बन जैसे नेता अब भी उनके साथ खड़े हैं, लेकिन Trump Iran War Policy ने यूरोप-अमेरिका संबंधों को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी मुश्किल लग रही है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह आक्रामक नीति न केवल वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाल रही है, बल्कि अमेरिका के पुराने कूटनीतिक ढांचे को भी ध्वस्त कर रही है।

युद्ध विराम की नई उम्मीद: क्या शांत होंगी तोपें?

Israel Direct Talks Lebanon की खबर ने मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल में एक नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधी बातचीत शुरू करने को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला उस वक्त आया है जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है।

हिज्बुल्लाह को निहत्था करने का बड़ा मिशन Israel Direct Talks Lebanon का प्राथमिक उद्देश्य सीमा पर जारी गोलाबारी को स्थायी रूप से बंद करना और हिज्बुल्लाह को हथियारों से मुक्त करना है। नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में बताया गया कि लेबनान की बार-बार आ रही मांगों के बाद कैबिनेट को बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इजरायल चाहता है कि बेरूत पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों से मुक्त हो ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।

नाजुक सीजफायर और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव Israel Direct Talks Lebanon की पहल ऐसे समय में हुई है जब दो हफ्ते का सीजफायर लागू होने के बावजूद लेबनान में हमले जारी थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेतन्याहू से फोन पर बात कर लेबनान में सैन्य कार्रवाई कम करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान के साथ चल रहा विवाद सुलझा नहीं, तो ईरान के साथ हुआ समझौता किसी भी वक्त टूट सकता है।

शांति की ओर बढ़ते कदम या कूटनीतिक दांव? Israe Direct Talks Lebanon शुरू होने से यह उम्मीद जगी है कि अब सीमावर्ती इलाकों में विस्थापित हुए लोगों की घर वापसी हो सकेगी। हालांकि, ईरान की शर्त है कि किसी भी समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाए, जिसे इजरायल और अमेरिका ने फिलहाल खारिज कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस सीधी बातचीत से क्या वास्तव में दशकों पुराना विवाद खत्म हो पाएगा।

दोहरी मुसीबत में नेतन्याहू: एक तरफ युद्धविराम, दूसरी तरफ अदालत

Benjamin Netanyahu Corruption Trial एक बार फिर दुनिया भर की सुर्खियों में है। ईरान के साथ युद्धविराम लागू होने और इजरायल में आपातकाल हटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुराने मामले की फाइलें दोबारा खुलने जा रही हैं। रविवार से शुरू होने वाली यह अदालती कार्यवाही नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

आपातकाल खत्म होते ही अदालती कार्यवाही सक्रिय इजरायली अदालतों के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि Benjamin Netanyahu Corruption Trial अब बिना किसी देरी के रविवार से बुधवार तक नियमित रूप से चलेगा। ईरान के साथ संघर्ष के दौरान लगे आपातकाल ने स्कूल, दफ्तर और अदालतों के काम को रोक दिया था। लेकिन अब जैसे ही आसमान से मिसाइलों और ड्रोनों का खतरा टला है, नेतन्याहू के लिए कानूनी मुश्किलों का नया दौर शुरू हो गया है।

सालों पुराना केस और गंभीर आरोप Benjamin Netanyahu Corruption Trial का इतिहास साल 2019 से जुड़ा है, जब उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 2020 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ यह मुकदमा कई बार युद्ध और अन्य कारणों से टलता रहा है। हालांकि नेतन्याहू इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं, लेकिन अब न्यायिक व्यवस्था सामान्य होने से उन पर दबाव बढ़ गया है।

राजनीतिक घेराबंदी और क्षमादान की चर्चा अक्टूबर 2023 के हमास हमलों और अब Benjamin Netanyahu Corruption Trial की वापसी ने उनकी दक्षिणपंथी सरकार को कमजोर कर दिया है। जहां एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें क्षमादान देने का समर्थन किया है, वहीं इजरायली परंपरा में इसे काफी कठिन माना जाता है। आगामी चुनावों से पहले यह ट्रायल नेतन्याहू के लिए \’करो या मरो\’ की स्थिति पैदा कर सकता है।

आधार पर नया घमासान: क्या तय होगी उम्र की सीमा?

Aadhaar Card Age Limit Debate ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक ताजा जनहित याचिका में यह मांग की गई है कि नया आधार कार्ड जारी करने के लिए एक निश्चित आयु सीमा तय की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, अब समय आ गया है कि वयस्कों के लिए आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सख्त बनाया जाए।

घुसपैठियों पर लगाम और सुरक्षा की चिंता वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में Aadhaar Card Age Limit Debate को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा गया है। उनका तर्क है कि मौजूदा ढीली व्यवस्था का फायदा उठाकर विदेशी घुसपैठिये आसानी से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवा रहे हैं। इसके जरिए वे राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अहम दस्तावेज हासिल कर खुद को भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश करते हैं, जो देश के लिए बड़ा खतरा है।

सिर्फ 6 साल तक के बच्चों को मिले आसानी से आधार याचिका में सुझाव दिया गया है कि नया आधार कार्ड केवल 6 साल तक के बच्चों को ही मिलना चाहिए। Aadhaar Card Age Limit Debate का मुख्य बिंदु यह है कि यदि कोई वयस्क नया आधार कार्ड बनवाना चाहता है, तो उसका सत्यापन एसडीएम या तहसीलदार स्तर के अधिकारियों द्वारा ही किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का मानना है कि चूंकि देश में 144 करोड़ से ज्यादा आधार पहले ही बन चुके हैं, इसलिए नियमों को कड़ा करने से असली नागरिकों को कोई परेशानी नहीं होगी।

फर्जी आधार और नागरिकता का भ्रम कोर्ट से यह भी मांग की गई है कि आधार केंद्रों पर बड़े बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर साफ लिखा हो कि आधार केवल \’पहचान का प्रमाण\’ है, नागरिकता का नहीं। Aadhaar Card Age Limit Debate के तहत यह मांग उठाई गई है कि फर्जी दस्तावेजों से आधार कार्ड बनवाने वालों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान हो। इस याचिका में यूआईडीएआई (UIDAI) के साथ-साथ गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है।

संकट में अवसर: भारतीय अर्थव्यवस्था की नई उड़ान

Shaktikanta Das Indian Economy को लेकर एक ऐसा विजन पेश किया है जिसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का ध्यान खींचा है। एआईएमए (AIMA) लीडरशिप कॉनक्लेव में बोलते हुए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत ने न केवल वैश्विक संकटों का सामना किया है, बल्कि हर मुश्किल दौर से वह पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है।

अस्थिर दुनिया में भारत का मज़बूत प्रदर्शन दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद, Shaktikanta Das Indian Economy की स्थिरता पर भरोसा जताया है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही है। पिछले पांच वर्षों की औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय बाजार का आधार बहुत गहरा और मजबूत है।

नीतियों की निरंतरता और बुनियादी ढांचे का विकास Shaktikanta Das Indian Economy की सफलता के पीछे ठोस नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास को मुख्य कारण मानते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महंगाई पर नियंत्रण रखना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि महंगाई कम होने से आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ती है। जब घरेलू मांग मजबूत होती है, तो बाहरी झटकों का अर्थव्यवस्था पर असर कम हो जाता है।

वैश्विक मंच पर भारत की बदलती तस्वीर अंत में, Shaktikanta Das Indian Economy के परिवर्तनकारी दौर का जिक्र करते हुए बोले कि भारत अब केवल बर्दाश्त करने वाला देश नहीं, बल्कि खुद को बदलने वाला देश बन गया है। कूटनीति और निर्णायक कदमों के दम पर भारत ने साबित कर दिया है कि वह ऊर्जा संकट और आर्थिक जोखिमों के बीच भी अपना रास्ता बनाना जानता है। आने वाले समय में यह लचीलापन भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार: \’बच्चों की तस्करी पर अब चुप नहीं बैठेंगे\’

Supreme Court Child Trafficking Warning ने देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हलचल मचा दी है। बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर तत्काल सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने राज्यों के \’उदासीन\’ रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

सक्रिय गिरोहों का जाल और राज्यों की सुस्ती अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि Supreme Court Child Trafficking Warning को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि देशभर में संगठित गिरोह सक्रिय हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका केवल निगरानी कर सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई करना राज्य सरकारों, पुलिस और गृह विभागों की जिम्मेदारी है। पीठ ने राज्यों से \’दिखावा\’ छोड़कर ठोस कार्रवाई करने की अपील की है।

2025 के ऐतिहासिक फैसले की अनदेखी पर गुस्सा Supreme Court Child Trafficking Warning के साथ ही अदालत ने अपने 15 अप्रैल, 2025 के फैसले को लागू न करने पर राज्यों को आड़े हाथों लिया। उस फैसले में कोर्ट ने आदेश दिया था कि तस्करी के मामलों की सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर हो और 6 महीने में केस निपटाया जाए। लेकिन कई राज्यों ने अभी तक इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं दिखाई है, जिसे कोर्ट ने चिंताजनक बताया।

लापता बच्चों को तस्करी का मामला मानने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जब तक कुछ और साबित न हो जाए, लापता बच्चों के हर मामले को तस्करी का केस मानकर ही जांच की जाए। Supreme Court Child Trafficking Warning के तहत अधिकारियों को जांच मानकों में सुधार करने और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को मजबूत करने को कहा गया है। मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट दाखिल न करने पर चेतावनी दी गई है।