दुनिया में नई दरार: ट्रंप की नीति से बिछड़े पुराने साथी

Trump Iran War Policy ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ऐसा भूकंप ला दिया है, जिसने अमेरिका के सबसे करीबी वैचारिक दोस्तों को भी उनसे दूर कर दिया है। व्हाइट हाउस वापसी के बाद डोनल्ड ट्रंप ने जिन दक्षिणपंथी ताकतों के साथ मिलकर नई वैश्विक धुरी बनाने का सपना देखा था, वही अब उनके सैन्य संघर्ष के फैसले के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं।

यूरोपीय दिग्गजों ने खींचे हाथ: मेलोनी और ले पेन का रुख Trump Iran War Policy को लेकर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और फ्रांस की कद्दावर नेता मरीन ले पेन ने कड़ा रुख अपनाया है। कभी ट्रंप की नीतियों के समर्थक रहे इन नेताओं ने अब उनकी युद्ध नीति को \’अस्थिर\’ बताते हुए उससे दूरी बना ली है। मेलोनी ने तो यहां तक कह दिया कि वह सिसिली हवाई अड्डे का उपयोग सैन्य अभियानों के लिए नहीं करने देंगी, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है।

नाटो सहयोगियों पर भड़के ट्रंप ईरान के खिलाफ शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष में उम्मीद के मुताबिक समर्थन न मिलने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की तीखी आलोचना की है। Trump Iran War Policy के कारण पैदा हुए इस तनाव ने एमएजीए (MAGA) समर्थकों और यूरोपीय राष्ट्रवादियों के बीच की एकजुटता को खत्म कर दिया है। जर्मनी की \’अल्टरनेटिव फार जर्मनी\’ पार्टी ने तो देश में मौजूद अमेरिकी हवाई अड्डों को खाली करने तक की मांग उठा दी है।

अकेले पड़ते ट्रंप और भविष्य की चुनौतियां हालांकि हंगरी के विक्टर ओर्बन जैसे नेता अब भी उनके साथ खड़े हैं, लेकिन Trump Iran War Policy ने यूरोप-अमेरिका संबंधों को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी मुश्किल लग रही है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह आक्रामक नीति न केवल वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाल रही है, बल्कि अमेरिका के पुराने कूटनीतिक ढांचे को भी ध्वस्त कर रही है।

युद्ध विराम की नई उम्मीद: क्या शांत होंगी तोपें?

Israel Direct Talks Lebanon की खबर ने मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल में एक नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधी बातचीत शुरू करने को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला उस वक्त आया है जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है।

हिज्बुल्लाह को निहत्था करने का बड़ा मिशन Israel Direct Talks Lebanon का प्राथमिक उद्देश्य सीमा पर जारी गोलाबारी को स्थायी रूप से बंद करना और हिज्बुल्लाह को हथियारों से मुक्त करना है। नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयान में बताया गया कि लेबनान की बार-बार आ रही मांगों के बाद कैबिनेट को बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इजरायल चाहता है कि बेरूत पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों से मुक्त हो ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।

नाजुक सीजफायर और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव Israel Direct Talks Lebanon की पहल ऐसे समय में हुई है जब दो हफ्ते का सीजफायर लागू होने के बावजूद लेबनान में हमले जारी थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेतन्याहू से फोन पर बात कर लेबनान में सैन्य कार्रवाई कम करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान के साथ चल रहा विवाद सुलझा नहीं, तो ईरान के साथ हुआ समझौता किसी भी वक्त टूट सकता है।

शांति की ओर बढ़ते कदम या कूटनीतिक दांव? Israe Direct Talks Lebanon शुरू होने से यह उम्मीद जगी है कि अब सीमावर्ती इलाकों में विस्थापित हुए लोगों की घर वापसी हो सकेगी। हालांकि, ईरान की शर्त है कि किसी भी समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाए, जिसे इजरायल और अमेरिका ने फिलहाल खारिज कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस सीधी बातचीत से क्या वास्तव में दशकों पुराना विवाद खत्म हो पाएगा।

दोहरी मुसीबत में नेतन्याहू: एक तरफ युद्धविराम, दूसरी तरफ अदालत

Benjamin Netanyahu Corruption Trial एक बार फिर दुनिया भर की सुर्खियों में है। ईरान के साथ युद्धविराम लागू होने और इजरायल में आपातकाल हटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुराने मामले की फाइलें दोबारा खुलने जा रही हैं। रविवार से शुरू होने वाली यह अदालती कार्यवाही नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

आपातकाल खत्म होते ही अदालती कार्यवाही सक्रिय इजरायली अदालतों के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि Benjamin Netanyahu Corruption Trial अब बिना किसी देरी के रविवार से बुधवार तक नियमित रूप से चलेगा। ईरान के साथ संघर्ष के दौरान लगे आपातकाल ने स्कूल, दफ्तर और अदालतों के काम को रोक दिया था। लेकिन अब जैसे ही आसमान से मिसाइलों और ड्रोनों का खतरा टला है, नेतन्याहू के लिए कानूनी मुश्किलों का नया दौर शुरू हो गया है।

सालों पुराना केस और गंभीर आरोप Benjamin Netanyahu Corruption Trial का इतिहास साल 2019 से जुड़ा है, जब उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 2020 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ यह मुकदमा कई बार युद्ध और अन्य कारणों से टलता रहा है। हालांकि नेतन्याहू इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं, लेकिन अब न्यायिक व्यवस्था सामान्य होने से उन पर दबाव बढ़ गया है।

राजनीतिक घेराबंदी और क्षमादान की चर्चा अक्टूबर 2023 के हमास हमलों और अब Benjamin Netanyahu Corruption Trial की वापसी ने उनकी दक्षिणपंथी सरकार को कमजोर कर दिया है। जहां एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें क्षमादान देने का समर्थन किया है, वहीं इजरायली परंपरा में इसे काफी कठिन माना जाता है। आगामी चुनावों से पहले यह ट्रायल नेतन्याहू के लिए \’करो या मरो\’ की स्थिति पैदा कर सकता है।