एक मां की मुस्कान और हजार माताओं का मातम
US Pilot Returns From Iran की खबर ने दुनिया भर में मानवता और युद्ध के दो अलग-अलग चेहरों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक अमेरिकी मां की प्रार्थना तब रंग लाई जब उनका बेटा, जो एक फाइटर पायलट था, सुरक्षित घर लौट आया। लेकिन इस खुशी के शोर में उन 1600 ईरानी माताओं की सिसकियां दब गई हैं, जिन्होंने इस भीषण बमबारी में अपने जिगर के टुकड़ों को हमेशा के लिए खो दिया।
युद्ध की विभीषिका और मासूमों की बलि US Pilot Returns From Iran के बीच ईरान से आ रहे आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। अमेरिकी-इजरायली हमलों में अब तक 3500 से अधिक ईरानी मारे जा चुके हैं, जिनमें 1600 से अधिक आम नागरिक और करीब 250 मासूम बच्चे शामिल हैं। तेहरान के पास मिनाब के एक स्कूल पर गिरी मिसाइल ने सौ से ज्यादा बच्चों की जिंदगी पलक झपकते ही खत्म कर दी, जिससे मानवता शर्मसार हुई है।
गांधीवादी दर्शन और हिंसा का दुष्चक्र सत्ताधीश भले ही युद्ध को जरूरी बताएं, लेकिन US Pilot Returns From Iran की घटना यह याद दिलाती है कि हिंसा हमेशा प्रतिहिंसा को जन्म देती है। महात्मा गांधी के अनुसार, हिंसा से प्राप्त कोई भी परिणाम स्थायी नहीं होता, बल्कि उसका बुरा असर पीढ़ियों तक बना रहता है। इस युद्ध से केवल हथियार बेचने वाली कंपनियों और अपनी कुर्सी बचाने वाले राजनेताओं को फायदा हो रहा है, जबकि आम इंसान केवल तबाही झेल रहा है।
शांति ही एकमात्र समाधान: भारत का रुख US Pilot Returns From Iran के बाद दुनिया को यह समझना होगा कि तबाही से उबरने में दशकों लग जाते हैं। यूक्रेन युद्ध का उदाहरण सबके सामने है, जहां बुनियादी ढांचे को सुधारने में अरबों डॉलर लगेंगे। भारत ने हमेशा पश्चिम एशिया और यूक्रेन में शांति की वकालत की है। क्योंकि शांति ही समृद्धि का द्वार खोलती है और युद्ध केवल विनाश की ओर ले जाता है। अब समय है कि दुनिया प्रतिशोध छोड़कर संवाद का रास्ता चुने।

