UPI Transactions Free: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर लगेगा चार्ज? सरकार ने दूर की करोड़ों ग्राहकों और छोटे दुकानदारों की बड़ी भ्रम की स्थिति!
UPI Transactions Free: सरकार का बड़ा फैसला
डिजिटल दुनिया में अचानक फैली सनसनी: UPI Transactions Free रहेंगे या हर पेमेंट पर कटेगा आपका पैसा, इस सवाल ने पूरे देश के आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की नींद उड़ा दी थी। लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास होते ही सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की अफवाहें तेजी से फैलने लगीं।
वित्त मंत्रालय की सीधी और कड़ी सफाई: UPI Transactions Free रखने को लेकर वित्त मंत्रालय ने तुरंत एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट पहले की तरह पूरी तरह से निशुल्क ही रहेंगे।
MDR और 2,000 रुपये का असली गणित: UPI Transactions Free रहने की गारंटी के बीच मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर नए प्रावधान सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यावसायिक ट्रांजैक्शन पर बैंकों को 0.25% से 0.4% तक का सीमित MDR लगाने की अनुमति दी जा सकती है।
रोजमर्रा की खरीदारी पर नहीं होगा असर: UPI Transactions Free रहने की वजह से दूध, सब्जी, किराना सामान या ऑटो और टैक्सी के किराए जैसे आम भुगतानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने साफ किया है कि आम जनता के दैनिक खर्च इस बदलाव से पूरी तरह सुरक्षित और अप्रभावित रहने वाले हैं।
सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बदलाव जरूरी: UPI Transactions Free मॉडल को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया गया है। NPCI की स्टीयरिंग कमिटी यह तय करेगी कि भविष्य में कौन से बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस मामूली शुल्क के दायरे में आएंगे।

