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CITY AVENUE
Hapur Free Ration Scheme: हापुड़ वालों के लिए बड़ी खबर, 25 सितंबर तक मिलेगा मुफ्त राशन और सस्ते दामों पर चीनी

Hapur Free Ration Scheme को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी कर सभी राशन कार्डधारकों को चौंका दिया है। जिले भर के हजारों राशन कार्डधारकों के लिए सितंबर महीने के खाद्यान्न वितरण से जुड़ी समय सीमा घोषित कर दी गई है।

25 सितंबर तक मिलेगा राशन Hapur Free Ration Scheme के अंतर्गत जिले की सरकारी राशन दुकानों पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत नि:शुल्क खाद्यान्न वितरण गुरुवार से शुरू हो चुका है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पात्र लाभार्थी 25 सितंबर तक ई-पॉस मशीनों के माध्यम से अपना निर्धारित खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।

अंत्योदय कार्डधारकों के लिए नियम Hapur Free Ration Scheme के तहत अंत्योदय राशन कार्डधारकों को प्रति कार्ड 21 किलोग्राम गेहूं और 14 किलोग्राम चावल समेत कुल 35 किलोग्राम मुफ्त राशन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त कार्डधारकों को तीन महीने के कोटे के तहत 18 रुपये प्रति किलो की दर से तीन किलो चीनी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

पात्र गृहस्थी और पोर्टेबिलिटी सुविधा Hapur Free Ration Scheme में पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल यानी कुल 5 किलो खाद्यान्न नि:शुल्क प्रदान किया जाएगा। आधार सत्यापन न होने की स्थिति में अंतिम दिन ओटीपी के माध्यम से भी राशन वितरण की विशेष सुविधा दी गई है।

रक्षाबंधन से पहले कांवड़ यात्रा में दिखा पवित्र रिश्तों का अनोखा रंग: भाइयों के कदम से कदम मिलाकर चल रहीं बहनें, देखिए हापुड़ की भावुक तस्वीर

Kanwar Yatra Brother Sister Bond की एक अनोखी और बेहद भावुक करने वाली तस्वीर हापुड़ कांवड़ मार्ग पर सामने आई है, जहां सावन की इस पवित्र यात्रा में आस्था के साथ भाई-बहन के अटूट रिश्ते का सुंदर रंग देखने को मिल रहा है। रक्षाबंधन से ठीक पहले गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे शिवभक्तों के कठिन सफर में उनकी बहनें सबसे बड़ी ताकत बनकर साथ चल रही हैं।

भक्ति के कठिन पथ पर बहनें बनीं सहारा और भाइयों के भारी-भरकम कांवड़ के बोझ को अपने स्नेह और दुआओं से हल्का कर रही हैं। मेरठ के धीरखेड़ा निवासी तनुष त्यागी ब्रजघाट से 121 लीटर गंगाजल लेकर पैदल यात्रा पर निकले हैं। उनका कहना है कि पैरों में छालों और थकान के बावजूद उनकी बहनें रियुषी त्यागी और खुशी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, जिससे हर मुश्किल राह आसान लग रही है।

बचपन की खट्टी-मीठी यादें बनीं ऊर्जा क्योंकि रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी और जिम्मेदारियों के कारण जो भाई-बहन अक्सर एक-दूसरे को समय नहीं दे पाते थे, उनके लिए यह कांवड़ यात्रा एक खूबसूरत अवसर बन गई है। कांवड़ मार्ग पर चल रहे शिवभक्तों का कहना है कि बचपन में छोटी-छोटी बातों पर लड़ने वाली बहनें आज इस भक्ति यात्रा में उनकी सबसे मजबूत ढाल बनी हुई हैं।

रक्षाबंधन का पर्व लाया खुशियों की नई सौगात जहां भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक की तैयारी के साथ-साथ भाई-बहन के प्रेम का यह पवित्र पर्व और भी खास हो गया है। हापुड़ के रास्तों से गुजरने वाले हर व्यक्ति को आस्था और पारिवारिक रिश्तों का यह अद्भुत तालमेल गहराई से प्रभावित और भावुक कर रहा है।