```html ``` ```html ``` ```html ``` ```html ```
CITY AVENUE
DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न, बदला राजनीतिक रुख

राजनीतिक हलचल: DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न सामने आने के बाद तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाने वाली पार्टी ने बुधवार को उनके विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन कर दिया।

24 घंटे में बदला सुर: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने महज एक दिन के भीतर अपना रुख बदल दिया। मंगलवार को पार्टी की ओर से राहुल गांधी को लेकर नाराजगी जाहिर की गई थी, जबकि बुधवार को पार्टी नेताओं ने उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया।

DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न क्यों आया?

वोटर लिस्ट विवाद: डीएमके की नाराजगी तमिलनाडु में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ी थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

राहुल गांधी पर सवाल: डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि तमिलनाडु में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर राहुल गांधी स्पष्ट रूप से आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं।

INDI गठबंधन की बैठक से दूरी: इसी नाराजगी के बीच डीएमके ने पिछले सप्ताह विपक्षी INDI गठबंधन की उस बैठक से भी दूरी बनाई थी, जिसमें चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होनी थी।

विरोध प्रदर्शन के बाद बदला DMK का रुख

राहुल गांधी का मार्च: मंगलवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान को रद्द करने की मांग उठाई गई।

डीएमके का समर्थन: बुधवार को डीएमके के मुख्य प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अलोकतांत्रिक रवैया अपनाता है तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ज्ञानेश कुमार पर निशाना: इलंगोवन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है और राहुल गांधी ने इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी का समर्थन क्यों अहम: DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में पहले से ही तनाव की चर्चा है। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के पुराने गठबंधन में दरार सामने आई थी।

कांग्रेस-DMK रिश्तों में तल्खी: चुनाव के बाद कांग्रेस की ओर से अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ी। इसके बावजूद चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के मुद्दे पर डीएमके का राहुल गांधी के समर्थन में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सियासी गलियारों में चर्चा: एक दिन पहले राहुल गांधी पर सवाल और अगले ही दिन उनके प्रदर्शन का समर्थन करने से डीएमके की रणनीति चर्चा का विषय बन गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके आगे किस तरह साथ दिखाई देती हैं।

SIR और Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, EC को नोटिस

SIR और Form 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने चुनावी प्रक्रिया पर नया सवाल खड़ा कर दिया है। अदालत ने निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार और चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है कि आखिर मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा जवाब: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। अदालत यह देखेगी कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना फॉर्म में बदलाव किया गया था या नहीं।

SIR और Form 6 पर क्या है विवाद: नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा खंड जोड़े जाने को लेकर विवाद हुआ था। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता के पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि यह एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें प्रभावी बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन जरूरी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी से किया इनकार: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने रिकॉर्ड आने के बाद यह देखने की बात कही कि फॉर्म में बदलाव किसने और किस प्रक्रिया के तहत किया।

CEC ज्ञानेश कुमार को राहत: याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग भी की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े आरोपों पर जवाब मांगा है।

आयोग के भीतर मतभेद भी चर्चा में: SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कई आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया और सामूहिक सहमति को लेकर सवाल और गहरे हुए।

अब आगे क्या होगा: सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को अपने पक्ष में जवाब देना होगा। इसके बाद अदालत रिकॉर्ड और प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करेगी। ऐसे में SIR और Form 6 से जुड़ी अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।