लखीमपुर में 10 रुपये की थाली, रोज मिटती सैकड़ों की भूख
Annapurna Rasoi Lakhimpur Kheri: 10 रुपये में भरपेट भोजन, रुचि पाल की अनूठी पहल
Annapurna Rasoi Lakhimpur Kheri: महज 10 रुपये में भरपेट भोजन और सैकड़ों जरूरतमंदों के चेहरे पर राहत की मुस्कान। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक ऐसी रसोई चल रही है, जहां गरीबों और मेहनतकश लोगों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। रुचि पाल की संवेदनशील सोच और समाजसेवियों के सहयोग से शुरू हुई यह पहल पिछले तीन वर्षों से लगातार जरूरतमंदों का पेट भर रही है।
Annapurna Rasoi Lakhimpur Kheri: कैसे हुई शुरुआत?
रिक्शा चालकों की परेशानी बनी प्रेरणा। लखीमपुर खीरी के सिकटिया की रहने वाली 25 वर्षीय रुचि पाल ने देखा कि कई रिक्शा चालक महंगाई के कारण महज समोसे खाकर अपनी भूख मिटाने को मजबूर हैं। जब उन्होंने एक रिक्शा चालक से इसकी वजह पूछी, तो रोज कमाने और खाने वाले लोगों की परेशानी सामने आई।
समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ। इस स्थिति ने रुचि पाल को जरूरतमंदों के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने मधुलिका त्रिपाठी के सामने अपनी योजना रखी। इसके बाद शहर के करीब 40 समाजसेवियों से संपर्क किया गया और सामूहिक सहयोग से 15 जून 2023 को अन्नपूर्णा रसोई की शुरुआत हुई।
रोज 150 से 200 लोगों को मिलता है भोजन
सिर्फ 10 रुपये में भरपेट थाली। Annapurna Rasoi Lakhimpur Kheri में हर दिन लगभग 150 से 200 लोग भोजन करते हैं। इनमें रिक्शा चालक, ऑटो चालक, अस्पतालों में मरीजों के तीमारदार और दूरदराज के गांवों से शहर आने वाले जरूरतमंद लोग शामिल हैं।
कम कीमत में बड़ी राहत। महंगाई के दौर में जहां बाहर खाना खाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है, वहीं यह रसोई उन्हें कम खर्च में भरपेट भोजन उपलब्ध कराती है। यह पहल जरूरतमंदों को भोजन के साथ सम्मान और सहारा भी देती है।
रसोई चलाने में रोज हजारों रुपये का खर्च
10 रुपये की थाली से पूरा नहीं होता खर्च। रिपोर्ट के मुताबिक, रसोई को चलाने में प्रतिदिन करीब 4,000 से 5,000 रुपये खर्च होते हैं। जबकि भोजन करने वालों से रोजाना लगभग 1,500 से 2,000 रुपये ही एकत्र हो पाते हैं।
हर दिन 2,500 से 3,000 रुपये की व्यवस्था। खर्च और आमदनी के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए प्रतिदिन अतिरिक्त राशि जुटानी पड़ती है। करीब 40 समाजसेवियों का सहयोग इस सेवा को लगातार जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चार महिलाओं की मेहनत से तैयार होता है भोजन
टीमवर्क से चल रही सेवा। अन्नपूर्णा रसोई के लिए भोजन मधुलिका त्रिपाठी के यहां तैयार किया जाता है। इसकी व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी हरि प्रकाश त्रिपाठी संभालते हैं। भोजन बनाने और अन्य जरूरी कामों में चार महिलाएं जुटी रहती हैं।
कई लोगों के सहयोग से जारी पहल। भोजन तैयार करने वाली महिलाओं के खर्च को भी रसोई के दैनिक बजट में शामिल किया जाता है। ऐसे में यह रसोई केवल भोजन बांटने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद के लिए सामूहिक प्रयास का उदाहरण भी है।
Annapurna Rasoi Lakhimpur Kheri बनी इंसानियत की मिसाल
छोटी रकम से बड़ा बदलाव। अन्नपूर्णा रसोई की कहानी बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। संवेदनशील सोच, निरंतर मेहनत और लोगों का सामूहिक सहयोग भी सैकड़ों लोगों की जिंदगी में राहत ला सकता है।
भूख के खिलाफ जारी है प्रयास। लखीमपुर खीरी की यह पहल जरूरतमंदों को सस्ती थाली उपलब्ध कराकर समाजसेवा की एक प्रेरक मिसाल पेश कर रही है। 10 रुपये में मिलने वाला भोजन उन लोगों के लिए बड़ी मदद है, जिनके लिए रोज दो वक्त का खाना जुटाना भी चुनौती बना रहता है।

