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CITY AVENUE
अश्लील वीडियो से ब्लैकमेलिंग, 4 गिरफ्तार; ₹1 करोड़ के लेनदेन का खुलासा

Mewat Sextortion Gang: अश्लील वीडियो से ब्लैकमेलिंग, दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ा

Mewat Sextortion Gang: एक वीडियो कॉल, फिर गिरफ्तारी की धमकी और लाखों रुपये की ठगी। दिल्ली पुलिस ने मेवात क्षेत्र से कथित तौर पर संचालित साइबर ब्लैकमेलिंग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस अधिकारी और यूट्यूब प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते थे। इस मामले में एक पीड़ित से 14.63 लाख रुपये की ठगी का आरोप है।

Mewat Sextortion Gang: ऐसे शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

व्हाट्सऐप पर भेजा अश्लील वीडियो। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारे में सेवादार मंजीत सिंह के व्हाट्सऐप पर पहले अश्लील वीडियो भेजा गया। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर गुरुग्राम पुलिस अधिकारी और यूट्यूब प्रतिनिधि बनकर फोन किए।

एफआईआर और गिरफ्तारी का डर। आरोपियों ने वीडियो देखने के मामले में कार्रवाई होने की बात कहकर पीड़ित को डराया। वीडियो को यूट्यूब और फेसबुक से हटवाने तथा एफआईआर से नाम निकलवाने के नाम पर रकम मांगी गई। पैसे नहीं देने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।

14.63 लाख रुपये की कथित ठगी

सितंबर 2025 में ट्रांसफर हुई रकम। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने 11 सितंबर 2025 से 27 सितंबर 2025 के बीच अपने और अपने भांजे के बैंक खातों से कई बार में कुल 14.63 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में भेजे।

साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत। रिश्तेदार से बातचीत के बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

100 से अधिक मोबाइल नंबरों की जांच

तकनीकी जांच से मिला सुराग। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने 100 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबरों और आईएमईआई की जांच की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आईपी लॉग के विश्लेषण से आरोपियों के तार राजस्थान के डीग जिले के कलतरिया गांव और आसपास के इलाकों से जुड़े मिले।

अलग-अलग बैंक खातों में भेजे रुपये। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। पुलिस के अनुसार, इन खातों से पैसे एटीएम, चेक और एनईएफटी के जरिए निकाले गए, ताकि खातों को फ्रीज किए जाने से बचाया जा सके।

फर्जी वीडियो कॉल से बनाते थे शिकार

पहले से रिकॉर्ड वीडियो का इस्तेमाल। जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ‘फ्रेंड्स सर्च’ ऐप से अलग-अलग इलाकों के मोबाइल नंबर तलाशते थे। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के दौरान दूसरे फोन पर पहले से रिकॉर्ड किया गया अश्लील वीडियो चलाया जाता था, जिससे सामने वाले को वास्तविक बातचीत का भ्रम होता था।

रिकॉर्डिंग के बाद ब्लैकमेलिंग। पुलिस के मुताबिक, कॉल रिकॉर्ड करने के बाद गिरोह के सदस्य पुलिस अधिकारी या यूट्यूब प्रतिनिधि बनकर संपर्क करते थे। वीडियो वायरल करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पैसे वसूले जाते थे।

चार आरोपियों की गिरफ्तारी, एक करोड़ से अधिक के लेनदेन की जांच

गिरोह के सदस्यों की अलग-अलग भूमिका। पुलिस ने इमरान खान, समद खान, अंकित सैन और तसलीम राजा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों में कुछ बैंक खातों और सिम कार्ड की व्यवस्था करते थे, जबकि कुछ खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया।

तीन मोबाइल और छह सिम कार्ड बरामद। पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में इन खातों के संबंध विभिन्न राज्यों में दर्ज 15 अन्य साइबर शिकायतों से भी मिले हैं। संबंधित खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का पता चला है।

Mewat Sextortion Gang से बचने के लिए क्या करें?

अनजान वीडियो कॉल से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति की वीडियो कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक या वीडियो से दूरी रखें।

धमकी मिलने पर पैसे न भेजें। यदि कोई खुद को पुलिस अधिकारी या सोशल मीडिया कंपनी का प्रतिनिधि बताकर गिरफ्तारी अथवा वीडियो वायरल करने की धमकी देता है, तो घबराकर भुगतान न करें। संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।

तुरंत साइबर अपराध की शिकायत करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

निष्कर्ष: दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई में कथित सेक्सटॉर्शन गिरोह के चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। एक मामले में 14.63 लाख रुपये की ठगी और संबंधित बैंक खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की जांच सामने आई है। पुलिस अब अन्य शिकायतों और नेटवर्क से जुड़े संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

राहुल गांधी के मार्च पर SC सख्त, न्यायपालिका को धमकाने पर चेतावनी

Rahul Gandhi March: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ी सियासी हलचल

Rahul Gandhi March: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने बढ़ाई चर्चा। राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को कोई भी डरा या धमका नहीं सकता। साथ ही, राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता से सफाई देने की बात कही गई।

Rahul Gandhi March: चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

याचिका पर मांगा जवाब। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

न्यायपालिका को लेकर CJI की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने दिया स्पष्ट संदेश। राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ता को अपने आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा।

वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद

विपक्ष ने उठाए सवाल। राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं का विरोध मार्च चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर था। विपक्ष ने इन मुद्दों पर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं उठाई हैं।

दिल्ली मेट्रो का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा, 10 अक्टूबर को एक भी ट्रेन रद्द नहीं

दिल्ली मेट्रो का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, 10 अक्टूबर को नहीं रद्द हुई कोई ट्रेन

Delhi Metro News: दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं को लेकर बड़ा सवाल उठा था। अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि उस दिन कोई भी मेट्रो ट्रेन रद्द नहीं की गई थी।

ट्रेनों के संचालन में नहीं हुई कटौती: DMRC के अनुसार, मेट्रो के कुल संचालन में कोई कमी नहीं की गई और ट्रेनों के फेरों की संख्या भी पहले की तरह बनी रही। हालांकि, सुरक्षा कारणों से कई स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखे गए थे।

दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन क्यों किए गए थे बंद?

303 स्टेशनों में से 45 पर पाबंदी: दिल्ली मेट्रो के पूरे नेटवर्क में कुल 303 स्टेशन हैं। इनमें से 45 स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। DMRC ने बताया कि यह कदम कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के आकलन और निर्देशों के आधार पर उठाया गया था।

258 स्टेशन यात्रियों के लिए चालू: DMRC के हलफनामे के मुताबिक, 258 स्टेशन यानी नेटवर्क के 85 प्रतिशत से अधिक हिस्से में यात्रियों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही।

10 अक्टूबर को कितने लोगों ने मेट्रो से किया सफर?

यात्रियों की संख्या में आई कमी: DMRC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 10 अक्टूबर 2026 को करीब 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया। वहीं, सामान्य दूसरे शनिवार को यात्रियों की संख्या लगभग 58 लाख रहती है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया था?

याचिका पर सुनवाई: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों के रद्द होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध न लगे।

DMRC ने दाखिल किया हलफनामा: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने DMRC और अन्य संबंधित पक्षों को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत मेट्रो कॉरपोरेशन ने अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट की।

दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले

मोदी कैबिनेट के फैसले: रेलवे कर्मचारियों को बोनस, दिव्यांग पेंशन पर भी बड़ा निर्णय

मोदी कैबिनेट के फैसले दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 78 दिन के बोनस को मंजूरी दी है। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा और दिव्यांगता पेंशन से जुड़े अहम बदलाव भी किए गए हैं।

मोदी कैबिनेट के फैसले: रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस

दिवाली का तोहफा: केंद्र सरकार ने रेलवे के लगभग 11,40,770 कर्मचारियों के लिए 78 दिन के परफॉर्मेंस-लिंक्ड बोनस को मंजूरी दी है। इस पर करीब 2,009 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह बोनस रेलवे के उन कर्मचारियों के योगदान को ध्यान में रखते हुए स्वीकृत किया गया है, जो सालभर रेलवे ट्रैक, लोकोमोटिव, वर्कशॉप और अन्य क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं।

अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस त्योहार से पहले उनके लिए बड़ी राहत है। इस फैसले से 11.40 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

सामाजिक सुरक्षा योजना को 2031 तक विस्तार

दूसरा बड़ा फैसला: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसे वर्ष 2031 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस कदम का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को आगे बढ़ाना है।

दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में बदलाव

40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी पात्रता: दिव्यांगता पेंशन के लिए पहले 80 प्रतिशत दिव्यांगता की पात्रता सीमा बताई गई थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है। इससे 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले लोग भी संबंधित पेंशन के पात्र हो सकेंगे, निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन।

मोदी कैबिनेट के फैसलों से किसे मिलेगा फायदा?

तीन अहम निर्णय: रेलवे कर्मचारियों के बोनस, सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क के विस्तार और दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में बदलाव से जुड़े ये फैसले कैबिनेट के प्रमुख निर्णयों में शामिल हैं। इनके क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा पर नजर रखना जरूरी है।

राहुल गांधी पर महिला पुलिसकर्मी से बदसलूकी का आरोप, BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन

Rahul Gandhi Misbehavior मामले पर BJP का प्रदर्शन

वायरल वीडियो से विवाद: Rahul Gandhi Misbehavior को लेकर दिल्ली में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। BJP महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय के पास प्रदर्शन कर राहुल गांधी पर महिला पुलिसकर्मी से कथित अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाया।

माफी की मांग: प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। यह विवाद 7 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के एक वायरल वीडियो के बाद सामने आया।

BJP का आरोप: BJP का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग के बीच राहुल गांधी ने एक महिला पुलिसकर्मी को धक्का देने की कोशिश की और अनुचित तरीके से छुआ। ये आरोप BJP नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।

Rahul Gandhi Misbehavior विवाद कैसे शुरू हुआ?

प्रदर्शन के दौरान घटनाक्रम: 6 और 7 अक्टूबर को INDI गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बैरिकेडिंग को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

वायरल वीडियो बना आधार: प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर BJP ने राहुल गांधी पर महिला पुलिसकर्मी से बदसलूकी का आरोप लगाया। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया।

पुलिस की FIR: दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट, धक्कामुक्की और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

Rahul Gandhi Misbehavior पर BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन

कांग्रेस मुख्यालय के पास प्रदर्शन: BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय के नजदीक प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग उठाई।

महिला सम्मान का मुद्दा: BJP ने इस मामले को महिलाओं के सम्मान और पुलिसकर्मियों के साथ व्यवहार से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। वहीं घटना को लेकर सामने आए वीडियो और उसके पूरे संदर्भ की जांच भी महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक तनाव बढ़ा: यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में SIR और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा INDI गठबंधन के प्रदर्शन जारी हैं। ऐसे में Rahul Gandhi Misbehavior विवाद ने राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

मामले में आगे क्या होगा?

वीडियो फुटेज की जांच: दिल्ली पुलिस प्रदर्शन से जुड़े वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटनाक्रम के दौरान वास्तव में क्या हुआ और वीडियो में दिखाई देने वाली घटना का पूरा संदर्भ क्या था।

आरोपों की पुष्टि बाकी: महिला पुलिसकर्मी से कथित बदसलूकी का आरोप फिलहाल राजनीतिक विवाद का विषय है। पूरे घटनाक्रम की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

GST Council का बड़ा फैसला, Tax Officers की Arrest Power खत्म

GST Council Meeting में बड़े Reform का ऐलान

बड़ा फैसला: GST Council Meeting में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। काउंसिल ने GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने को मंजूरी दी है।

Prosecution Limit बढ़ी: GST Council Meeting में prosecution की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और सामान्य मामलों में कारोबारियों पर आपराधिक कार्रवाई का दबाव कम करना है।

GST Rates में बदलाव नहीं: इस बैठक में GST की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस बार फोकस tax rates के बजाय compliance आसान करने और GST व्यवस्था को ज्यादा सरल बनाने पर रहा।

GST Council Meeting में Arrest Power क्यों खत्म हुई?

कारोबारियों को राहत: GST अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने का फैसला tax enforcement को अधिक proportionate बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि गंभीर मामलों में prosecution की व्यवस्था बनी रहेगी।

कई राज्यों को थी आपत्ति: बैठक से पहले महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश समेत कुछ राज्यों ने गिरफ्तारी शक्ति पूरी तरह हटाने को लेकर चिंता जताई थी।

Judicial Oversight: प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई के लिए न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका बढ़ेगी। इससे tax disputes और criminal offences के बीच अंतर स्पष्ट करने पर जोर है।

GST Council Meeting के दूसरे बड़े फैसले

Refund में तेजी: GST refund applications के acknowledgement की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का फैसला किया गया है। पात्र refund claims में 90 प्रतिशत राशि risk check के आधार पर तीन working days में जारी करने की व्यवस्था बताई गई है।

₹10 हजार से नीचे Notice नहीं: काउंसिल ने ₹10,000 से कम राशि वाले मामलों में GST show-cause notice जारी करने के लिए threshold तय किया है। इसका उद्देश्य low-value disputes का compliance burden कम करना है।

ITC में राहत: कर्मचारियों के insurance पर employers द्वारा किए गए खर्च के लिए Input Tax Credit की सुविधा को भी मंजूरी दी गई है, लागू शर्तों के अधीन।

Delivery Service पर राहत: e-commerce platforms के जरिए काम करने वाले unregistered delivery partners की delivery services पर GST को 5 प्रतिशत किए जाने का फैसला भी सामने आया है।

Business Compliance आसान: GST Council Meeting का फोकस registration, refunds, ITC, exports और tax disputes की प्रक्रियाओं को आसान और technology-driven बनाने पर रहा।

DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न, बदला राजनीतिक रुख

राजनीतिक हलचल: DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न सामने आने के बाद तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाने वाली पार्टी ने बुधवार को उनके विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन कर दिया।

24 घंटे में बदला सुर: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने महज एक दिन के भीतर अपना रुख बदल दिया। मंगलवार को पार्टी की ओर से राहुल गांधी को लेकर नाराजगी जाहिर की गई थी, जबकि बुधवार को पार्टी नेताओं ने उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया।

DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न क्यों आया?

वोटर लिस्ट विवाद: डीएमके की नाराजगी तमिलनाडु में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ी थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

राहुल गांधी पर सवाल: डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि तमिलनाडु में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर राहुल गांधी स्पष्ट रूप से आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं।

INDI गठबंधन की बैठक से दूरी: इसी नाराजगी के बीच डीएमके ने पिछले सप्ताह विपक्षी INDI गठबंधन की उस बैठक से भी दूरी बनाई थी, जिसमें चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होनी थी।

विरोध प्रदर्शन के बाद बदला DMK का रुख

राहुल गांधी का मार्च: मंगलवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान को रद्द करने की मांग उठाई गई।

डीएमके का समर्थन: बुधवार को डीएमके के मुख्य प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अलोकतांत्रिक रवैया अपनाता है तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ज्ञानेश कुमार पर निशाना: इलंगोवन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है और राहुल गांधी ने इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी का समर्थन क्यों अहम: DMK का राहुल गांधी पर यू-टर्न ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में पहले से ही तनाव की चर्चा है। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के पुराने गठबंधन में दरार सामने आई थी।

कांग्रेस-DMK रिश्तों में तल्खी: चुनाव के बाद कांग्रेस की ओर से अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ी। इसके बावजूद चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के मुद्दे पर डीएमके का राहुल गांधी के समर्थन में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सियासी गलियारों में चर्चा: एक दिन पहले राहुल गांधी पर सवाल और अगले ही दिन उनके प्रदर्शन का समर्थन करने से डीएमके की रणनीति चर्चा का विषय बन गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके आगे किस तरह साथ दिखाई देती हैं।

SIR और Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, EC को नोटिस

SIR और Form 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने चुनावी प्रक्रिया पर नया सवाल खड़ा कर दिया है। अदालत ने निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार और चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है कि आखिर मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा जवाब: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। अदालत यह देखेगी कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना फॉर्म में बदलाव किया गया था या नहीं।

SIR और Form 6 पर क्या है विवाद: नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा खंड जोड़े जाने को लेकर विवाद हुआ था। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता के पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि यह एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें प्रभावी बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन जरूरी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी से किया इनकार: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने रिकॉर्ड आने के बाद यह देखने की बात कही कि फॉर्म में बदलाव किसने और किस प्रक्रिया के तहत किया।

CEC ज्ञानेश कुमार को राहत: याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग भी की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े आरोपों पर जवाब मांगा है।

आयोग के भीतर मतभेद भी चर्चा में: SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कई आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया और सामूहिक सहमति को लेकर सवाल और गहरे हुए।

अब आगे क्या होगा: सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को अपने पक्ष में जवाब देना होगा। इसके बाद अदालत रिकॉर्ड और प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करेगी। ऐसे में SIR और Form 6 से जुड़ी अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।

Namo Bharat Trip Pass: दैनिक यात्रियों के लिए बड़ी राहत, नमो भारत ने लॉन्च किया नया ‘ट्रिप पास’ जिससे सफर होगा सस्ता और आसान

Namo Bharat Trip Pass की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के लाखों दैनिक यात्रियों के लिए सफर करना पहले से कहीं ज्यादा सुगम और किफायती हो गया है। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का संचालन करने वाली एजेंसी ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।

रोजाना सफर करने वालों को मिलेगी राहत Namo Bharat Trip Pass की मदद से अब रोजाना ऑफिस या कॉलेज आने-जाने वाले यात्रियों को हर दिन टिकट खरीदने की लंबी लाइनों से मुक्ति मिल जाएगी। यह नई सुविधा बिल्कुल एक बल्क ट्रेवल पास की तरह काम करती है, जिससे पैसेंजर्स एक साथ कई यात्राओं के लिए बुकिंग कर सकते हैं।

समय और पैसे दोनों की होगी बचत Namo Bharat Trip Pass के जरिए यात्रियों को निश्चित रूट और स्टेशनों के बीच यात्रा करने पर विशेष सुविधा और वित्तीय लाभ दोनों मिलेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल टिकटिंग प्रक्रिया तेज होगी बल्कि नियमित कम्यूटर्स का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा।

डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था को बढ़ावा Namo Bharat Trip Pass इस आधुनिक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर सफर करने वाले लोगों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यात्रियों को विश्व स्तर की सुविधाएं प्रदान करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रति लोगों के रुझान को और अधिक बढ़ाना है।

Congress CWC Meeting: CWC की बैठक में नीतीश कुमार का जिक्र करने पर भड़कीं सोनिया गांधी, दिग्विजय सिंह को बीच में रोका और दिया कड़ा जवाब

Congress CWC Meeting के बंद कमरे के भीतर एक तीखी और चौंकाने वाली बहस की खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पार्टी की उच्च स्तरीय बैठक के दौरान वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई इस तीखी नोकझोक ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

दिग्विजय सिंह ने उठाया नीतीश कुमार का मुद्दा Congress CWC Meeting में उस वक्त अप्रत्याशित माहौल बन गया जब वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने विपक्षी गठबंधन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को गठबंधन से उनके जाने की परिस्थितियों पर गहराई से मंथन करना चाहिए था।

सोनिया गांधी की दो टूक और तीखी प्रतिक्रिया Congress CWC Meeting की इस चर्चा के बीच पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तत्काल दखल देते हुए दिग्विजय सिंह को बीच में ही रोक दिया। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि जो हुआ वह ठीक नहीं था और अच्छा हुआ कि वे समय रहते गठबंधन से अलग हो गए।

बैठक में सियासी रणनीति पर मंथन Congress CWC Meeting का यह अंदरूनी वाकया ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीतियों को लेकर पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रही है। इस घटना ने पार्टी के भीतर पुराने समीकरणों को लेकर जारी आंतरिक बहसों को उजागर कर दिया है।